BHARATMALA PROJECT CG | सड़क प्रोजेक्ट के बीच फंसे 34 गांवों के लोग

रायपुर। छत्तीसगढ़ में रायपुर से सारंगढ़ तक बनने वाली 51.900 किमी लंबी नई सड़क ने 34 गांवों के लोगों को मुश्किल में डाल दिया है। Raipur जिले की तीन तहसीलों की जमीन पर 16 जुलाई 2025 से खरीदी-बिक्री, डायवर्सन और बटांकन पर रोक लगी हुई है। लेकिन महीनों बाद भी न जमीन का अधिग्रहण पूरा हुआ और न ही मुआवजे की अंतिम सूची तैयार हो पाई।
यह सड़क केंद्र सरकार के Ministry of Road Transport and Highways के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 130 बी को फोरलेन करने के प्रोजेक्ट का हिस्सा है। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया के नाम पर धरसींवा, मंदिरहसौद, खरोरा, आरंग और रायपुर तहसील के 34 गांवों की सैकड़ों एकड़ जमीन पर रोक लगा दी गई।
अब हालात यह हैं कि लोग अपनी जरूरत के समय भी अपनी ही जमीन नहीं बेच पा रहे। किसी की बेटी की शादी अटकी है, कोई बच्चों को पढ़ाई के लिए बाहर नहीं भेज पा रहा, तो कोई नया प्रोजेक्ट शुरू नहीं कर पा रहा। बरौंडा के जगन्नाथ वर्मा और टेकारी के विजय मित्तल जैसे कई लोगों का कहना है कि निजी जरूरत के लिए जमीन बेचनी थी, लेकिन प्रशासनिक रोक के कारण सब ठप है।
रिंग रोड थ्री क्षेत्र के पवन टाटिया और अशोक सिन्हा की जमीन भी इसी प्रोजेक्ट में आ रही है। उनका कहना है कि महीनों से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन न मुआवजे की रकम तय हुई और न चेक मिला। भारतमाला मुआवजा घोटाले के बाद से प्रक्रिया और धीमी पड़ गई है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं कि कितने लोगों को कितना मुआवजा मिलेगा।
एसडीएम रायपुर नंद कुमार चौबे का कहना है कि अधिग्रहण और मुआवजा संबंधी प्रक्रिया जारी है, इसलिए फिलहाल रोक हटाई नहीं जा सकती। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सैकड़ों परिवार अनिश्चितता में फंसे हुए हैं और प्रशासन की चुप्पी से नाराज हैं।



