JHIRAM GHATI | 13 साल बाद फैसला, पर सवाल बरकरार – मास्टरमाइंड से पूछताछ नहीं!

जगदलपुर। 25 मई 2013 के झीरम घाटी नरसंहार मामले में 13 साल बाद बड़ा फैसला आया है। जगदलपुर की स्पेशल NIA कोर्ट ने मामले में 10 नक्सलियों को दोषी ठहराया है। इनमें से एक आरोपी की ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है। दोषियों की सजा पर फैसला अब 16 सितंबर को होगा।
लेकिन कोर्ट के फैसले के साथ ही झीरम कांड की जांच को लेकर एक बड़ा सवाल भी सामने आया है। मामले के प्रमुख वांछित आरोपी और कथित मास्टरमाइंड थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी ने 24 फरवरी 2026 को तेलंगाना में सरेंडर किया था। इसके बाद उसने मई में 12वीं की परीक्षा भी दी, लेकिन उपलब्ध जानकारी के मुताबिक झीरम मामले में अब तक उससे पूछताछ नहीं हुई है।
NIA की जांच के मुताबिक झीरम हमले की तैयारी पहले से की गई थी। फरवरी 2013 में रणनीति बदलकर मिनपा के बजाय दरभा क्षेत्र को निशाना बनाने का फैसला लिया गया था। हमले के लिए हथियारबंद दस्ते, राशन और जंगल में कैंप तक तैयार किए गए थे।
25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का काफिला झीरम घाटी से गुजर रहा था। IED विस्फोट के बाद माओवादियों ने रास्ता रोककर काफिले पर गोलीबारी की। हमले में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत 29 लोगों की जान गई थी।
मामले में करीब 33 आरोपी अब भी फरार बताए जा रहे हैं। वहीं, कुछ नामजद आरोपी बाद में सरेंडर कर चुके हैं।
झीरम मामले के अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता दिनेश पाणिग्रही के मुताबिक, जिन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश हुई, उन्हीं के खिलाफ ट्रायल चला और कोर्ट ने उन्हीं पर फैसला दिया है। वहीं, पूर्व एडीजी नक्सल ऑपरेशन के अनुसार जरूरत होने पर सरेंडर कर चुके आरोपियों से भी पूछताछ की जा सकती है।



