CG RIVER POLLUTION | 2000 करोड़ खर्च, फिर भी नदियां क्यों गंदी?

रायपुर। छत्तीसगढ़ में नदियों की सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सबसे बड़ा सवाल वहीं खड़ा है, गंदा पानी आखिर नदियों में पहुंच क्यों रहा है?
प्रदेश की महानदी, शिवनाथ, खारून, हसदेव, अरपा और केलो जैसी नदियों पर प्रदूषण का दबाव बना हुआ है। शहरों का सीवरेज, घरों-दुकानों का गंदा पानी और औद्योगिक अपशिष्ट जलस्रोतों तक पहुंचने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।
और यहीं से कहानी मध्यप्रदेश के ब्यावरा तक पहुंचती है।
वहां ‘बिट्टू तबाही’ के नाम से चर्चित युवा ने अजनार नदी की सफाई का अभियान शुरू किया। उनकी मुहिम सोशल मीडिया पर वायरल हुई और कई लोगों ने इसकी तारीफ की। हालांकि, अजनार नदी की सफाई को लेकर स्थानीय निकाय और कुछ ग्राउंड रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि सिर्फ कचरा निकालना स्थायी समाधान नहीं है, नदी में पहुंच रहे नालों के गंदे पानी को रोकना भी जरूरी है।
यही सवाल छत्तीसगढ़ के लिए भी अहम है, क्या यहां भी नदियों को बचाने के लिए सिर्फ बजट और योजनाएं काफी हैं, या फिर जमीन पर उतरकर काम करने की जरूरत है?
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक राज्य में सीवरेज ट्रीटमेंट की क्षमता और वास्तविक गंदे पानी के उत्पादन के बीच अंतर बना हुआ है। ऐसे में नदी सफाई के साथ-साथ सीवरेज नेटवर्क और STP की क्षमता बढ़ाना जरूरी होगा।
सबसे बड़ा सवाल
नदी के किनारे सफाई अभियान चलाने से तस्वीर कुछ समय के लिए बदल सकती है, लेकिन जब तक नालों का गंदा पानी नदी में गिरना बंद नहीं होगा, समस्या दोबारा लौट सकती है।
यानी छत्तीसगढ़ को सिर्फ एक ‘बिट्टू तबाही’ नहीं, बल्कि सिस्टम के स्तर पर लगातार काम करने वाली पूरी व्यवस्था चाहिए।



